****जननी ****

छोटी सी आशा वो मन में लिए, हर पल जीती अपनो के लिए |
करती नहीं गिला कभी वो, सह लेती गम अपनो के दिए ||
रात जाग कर काम करे वो, सुबह उठे पलकों पे ख्वाब लिए |
इधर उधर हर ओर देखे वो, पर कोई नहीं खड़ा उसके लिए ||
माँ की ममता है जो सबकी, कभी अर्धांगिनी का प्यार लिए |
कभी बने वो सखी सहेली, कभी मिले आँचल की छाँव लिए ||
ये जीवन उसकी ही देन है, फिर भी नहीं कुछ उसके लिए |
कोई तो हो जो ये भी कहते दे, आ सब कुछ लुटा दूँ तेरे लिए ||
ना करे कोई अपमान भी उसका, हो थोड़ी इज़्ज़त उसके लिए |
कर दे जो सब कुछ अर्पण, क्या हम ना कुछ करें उसके लिए ||
जिसने ना मांगा कुछ भी, आज रखे ये उपहार उसके लिए |
आओ मिलकर हर्ष मनाए, हम आज उस जननी के लिए ||

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