*****हिसाब ****

क्या पाया, क्या खोया, इसका हिसाब प्यार क्या रखे|
जो मिला नसीब से प्यार, क्या हम उसे ना संजो के रखें||
दूर जाना ना कभी हमसे प्यार की कश्ती के मुसाफिर |
कि जब हिसाब हो प्यार का तो उसमें तेरा और मेरा ही नाम रहे||
प्यार दिल में हो इस कदर की आखों में तेरा ही नाम रहे|
जो खोया दिल, तो दर्द पाया है चलो इस दर्द को संभाल कर रखें|

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