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Showing posts from July, 2015

****************गुरु वंदना **************

गुरु बिन ज्ञान नहीं आधार नहीं “गुरुर्ब्रह्मा माने गुरु जो करती सृजन हमारा उस ब्रम्हा रूपी गुरुवर को नमन” “गुरुर्विष्णुः माने गुरु जो करते है हमारे अवगुण का नाश उस विष्णु रूपी गुरु को प्रणाम” “गुरुर्देवो माहेश्वर माने गुरु जो देते है अपार स्नेह और वरदान ज्ञान के रूप में ऐसे शिव रुपी गुरु को वंदन” “आज जो पाया इस जीवन में गुरु की कृपा से पग पग में हम बढ़ें जिंदगी में कुछ करें यह ज्ञान मिला उनके चरणों में सूरज के उजियारे जैसा तेज़ है उनके चेहरे में ऐसे गुरुवर गुनी जनो का आशीर्वाद है मेरे जीवन में मिटटी के ढेर को आकार दिया ज्ञान भरा अन्तः मन में
दिया बहुत कुछ गुरु ने हमको ये पुस्फ करूँ मैं अर्पण उनके चरणों में”

***********बयां ***************

हसरतें इतनी न बढ़ा की कदम रुक न सके  ये सोच कुछ कहने से पहेले हम रुक जाते है  आलम ऐ जिक्र न कर की  जब गुफ्तगू ना हो  ये ही सोच कर तेरी तरफ खिचे चले आते हैं ..............

*************सुबह ***********

नयी दुल्हन जैसी किरणे आयी
धरती पर वो मोती बिखराई
पलछीन में ओस बनायी
ओस उड़ी उन सपनो जैसी
जैसे जैसे धूप गहराई

**************भुलाना *************

वो हमसे कहते है ना रख नाज़्दीकीया इतनी 
दूर जाना मुश्किल हो जाये 
पर हम कहते है की नज़्दीकीया तो तब बढ़ेंगी 
जब आपको भुलाया जाये 
किसी ने कहा है 
वो उन्हे याद करें की भुलाया हो जिन्हे 
हमने उनको ना भुलाया ना कभी याद किया 
......

**********''’''वो दिन वो पल्छीन '""""**********

लो आया वो दिन फ़िर नयी सी ख्वाहिश ले कर
जो बीता चले हम एक साथ कुछ यादें जी कर
वो लम्हे वो पलछीन हमे बरसो
याद आयेंगे
उस खुशी का हमेशा एहसास. दिलायेंगे कुछ गुदगुदा कर
याद करेंगे जब वो गीत जो हमे गये
आँखें छलक पड़ेंगी वो नम आँखें याद कर
वो हंसना तेरा वो पलके उठा कर देखना तेरा वो मुस्कुराकर बात टालना वो ठहाको में ग़म को दबना वो नज़रो का एक टक देख्ते रहना
दबे पैरों तले ये यादें रुलायेंगी छल कर
दिन महीने साल यूँ ही गुज़र जायेंगे पर वो दिन वो पल यू हीं
यहीं रेह जायेंगे रुककर
याद है जब हमने मुहँ मीठा किया अपने जश्न ए दोस्ती का
वो मीठा पन आज भी है इस लहू मे घुलकर
फ़िर आ गयी याद वो विरह की बेला जब हमने किया इस रात को रुख़सत एक टक तुम्हे जाते हुए देख्कर
मत भुलाना ये दिन ये पल्छीन
क्युँकी ये फ़िर आयेगा हमे मिलाने पलटकर.....

**************वो पल********************

आज भी याद है वो दिन
जैसे कल ही बिताया हो वो पल
बिताया क्या जीया हो वो पल
और उस पल में सिर्फ हम है
ना ही वो आज है ना ही वो कल
ये वी पल है जहान ना बंदिशे है जमाने की ना रस्मों के बंधन है
ना उम्र की सीमा है बस यही है वो पल
घंटो बातें करने पर भी ना खतम होने वली कहनी है ये पल
वो पल अभ्भी सजीव सा इन आँखों में चलता है
जैसे कभी ना खतम होने वाला ये पल
वो फूल शायद सुख गये होंगे पर उनकी महक से खुस्नुमा है ये पल
वो रास्ते अब भी आबाद होंगे
पर उन्मे छुपी उस तनहाई जैसा पल
हम जुदा हुए जिस पल आज भी सिसकियाँ लेता है वो पल
तेरे आने की राह ताके बैठा सहमा सकुचा सा ये पल

****************तुम बिन**************

तुम बिन जीना जैसे तन मे रूह ना होना
बैठे चुपचाप एक टक देखना दूर वो शीतिज़ का कोना
खाली शाम और जुगनुओं का रोना
कहीं दिवाली की रोशीनी कहीं खाली आसमान होना
मिलने चले हम तुमसे पर साथ खयाल का होना
तुम बीन जीना जैसे तन मे रूह ना होना
चली हवा फिर खुशबू लेई जिसे महके दिल का कोना
ना उमीदी की छटा घहरायी जैसे कोई स्वपन अन्होना
गुनगुन करती हवा सरसराई जैसे गुंजा स्वर कोई गहरा
मन के तार वो छेड़ गया यूँ
जैसे प्यार वो पहला पहला

तुम बिन जीना जैसे तन मे रूह ना होना

**************याद ****************

आज फिर याद आये कुछ किस्से छुटे  पुराने
फिर बीती यादों का रेला आया हमे रुलाने
हम भूले न जिन्हें उम्र भर क्या वो फिर आयेंगी हमे हंसाने

**************सुहानी याद****************

बारिश की झडी लगी है कहती हम से वही कडी है
वो बचपन की यादे ढूॅढे 
जिनमे भिगे भागे घूमे 
वो मिलने के सपने देखे
जिनमे खो जाने को मचले
बहुत पुरानी याद पडी है
बारिश की फिर झडी लगी है
कितने सावन बिते तुम बिन
कितने तुम संग साथ बिताये
बूंद पडे जब इस तन पर तो
बहला जाये मन ये गाये 
मनलुभावन ये वो घडी है
बारिश की फिर झडी लगी है
गुमसुम गुमसुम गुपचुप गुपचुप
उसकी आहट दिल तक आये
हमने पल जो साथ बिताये
पलक झपकते बह वो जाये
जैसे बारिश गिरती जाये 
बडी सुहानी याद पडी है
देखो बारिश की फिर वो झडी लगी है

****************मेरे प्रियतम***************

प्यार तुम्ही श्रृंगार तुम्ही इस जीवन का आधार तुम्ही 
तुम बीन जीवन कभी ना जीना मेरा पहला प्यार तुम्ही 
तुमसे सुबह तुम्ही से शामे सारे  दिल के तार तुम्ही 
तुम्ही पे मरना तुम्ही पे मिटना 
सोचूँ मे हर बार यही 
तुमने जो सम्मान दिया है उस से बढ़कर कोई मान नही 
हर साँस  कह रही है ये मुझसे 
मेरे प्रियतम और मेरे संसार तुम्ही

************एक शक्स***************

एक शक्स  ऐसा भी देखा 
जो ना मेरी सोच के जैसा 
हम रहते अपने सपनों  मे 
हम रहते अपने अपनो मे 
उसको अलग थलग सा देखा 
हम हँसते रोते बातों पर 
उसके चेहरे पर मौन की रेखा 
हम जीते दुजों से मिलकर
उसे अकेला चलते देखा 
उसे याद हम दिन  रात है करते 
उसे ना आहें भरते देखा  
हम शिकवे करते अपनो  से 
उसे कभी ना झगड़ते देखा
हम मर मिटते है जब उस पर 
उसे कभी ना झरते देखा

************** ज़िंदगी****************

आपाधापी दौड़ा दौड़ी दौर ए ज़िंदगी है 
आज मिले कल बिछड़े दौर ए ज़िंदगी है 
कभी हँसती कभी गुनगुनाती जाये ये ज़िंदगी 
जो बीत गये वो पल वही है ज़िंदगी 
हम रुक गये जहां  ठहर गये जहां   वहीं है जिंदगी 
पर फ़िर जब कदम बढ़े तो बढ़ गयी ज़िंदगी

***************खामोशियाँ *********************

खामोशियाँ कहती और सुनती सी 
खामोशियाँ खिलती सी बुझती सी 
खामोशियाँ इठलाती सी घबराती सी 
इन खमोशीयों को समझो ना समझाओ क्युँकी इनमे है चिंगारी दबी सी 
खमोशीयों की रेहने दो खमोशीयों सी

**************राज़ ******************

कुछ अनजाना अनसुना राज ए उल्फत था छुपाने को 
हम वो कर गये बयान जो ना था  सुनाने को 
हमने कीये  ये लाख जतन तुम्हे भुलाने को 
पर याद का क्या वो तो आ ही गयी हमे रुलाने को

*************** इंतज़ार *****************

रात का आलम ना पूछ एय साकी 
गुज़री पुरी इश्क और इंतज़ार ए साथी में 
चांद उतरता गया मेरे चेहरे जैसा 
में ढूंढता रहा तुझे बेकरार जैसा 
कभी इस करवट ढूंढl कभी उस करवट 
पर तु कहीं नही था मेरे हम्नावा जैसा 
हम नही समझते क्या गलत क्या सही 
पर सही करना सीखना है ज़िंदगी जैसा 
कभी हँसाय कभी रुलाय ये ज़िंदगी किस मोड़ पर है लेई ज़िंदगी 
पर अब तो लगता है ये सिलसिला खत्म हीगा मौत जैसा

****************एक गुजारिश*********************

एक गुजारिश मेरी ऐसी कभी ना पुरी होने जैसी
छोटे बच्चों की कुछ जिद के जैसी
माँ की अंधी ममता जैसी
पल मे बिगड़े पल मे रूठे
कोई अल्हड़ जवानी जैसी एक गुजारिश मेरी ऐसी कभी ना पुरी होने जैसी हमने सोचा जीत ले जग को
पर कभी ना पूरी होने जैसी
बार बार कोशिश करते है
फ़िर दम भरते आगे बढ़ते है
लगता है ये मुश्किल थोड़ी
पर है ये बिल्कुल सपनो जैसी एक गुजारिश मेरी ऐसी कभी ना पुरी होने जैसी मंदिर मंदिर माथा टेका
कर दो भगवन ख्वाहिश पूरी
पर दिल से आवाज़ ये आयी
मत माँगो ये ख्वाहिश ऐसी
प्रयत्न करो म्रग तृष्णा तोड़ो नही है कोई है कोई ख्वाहिश ऐसी
कभी ना पुरी होने जैसी नही है कोई है कोई ख्वाहिश ऐसी
कभी ना पुरी होने जैसी

*************माँ******************

Image
माँ तु है दिल को फ़िर याद आयी
पर देखा आँखें खोल तो तु मेरे मॅन में है मुसकायी
तेरी ममता की छाँव जब से है पायी
धन्य हुआ जीवन कण कण में है खुशियां छाई
हमारी अठखेलियाँ लड़कपन गल्तीयाँ  सब तूने है छिपायी
तुझको पाया तो लगा
खुदा के रूप की नियमत है पायी
दूर कभी जो गयी हो मुझसे
हर पल तेरी बातें तेरी याद ही आयी
कभी ना जाना दूर तु हमसे
हमेशा करना हमारी हौसला अफ्जाई
ये कविता नही तुम्हारे काबिल
पर शायद इसको पढ़ कर तेरे चेहरे पर मुस्कान है छाई दुनिया की सबसे बेहतरीन माँ  को समर्पित.........

***************दोस्ती *************

हम सब चले थे साथ इन रास्तों पर
क्या खबर थी की मंज़िलें बादल जेएँगी
ये रास्ते खो जायेंगे हमे ले जायेंगे दूर कहीं दूर
पर वक़्त की आँधी ने फ़िर हमे मिलाया और जीना हमे सिखाया
तो क्युन ना जीये इस पल की मदहोशि में और टकराये दोस्ती के ये जाम
एक सुहानी शाम हमारी दोस्ती  के नाम