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******************नया साल***************

******************नया साल*************** लो आ गया फिर एक नया साल ले के सपने हज़ार फिर वही खुशियाँ उमीदें उड़ जाने की सपनो के पार जहाँ लगे की है शांति सुकून अब हर जगह जार जार क्या सच है ये उम्मीद जिस पर हम जीते है हर बार कितने लोग मिलते कितने बिछड़ जाते हमसे हर साल फिर क्यूँ जाने वालों की याद करता है ये दिल बार बार दुनिया वही सपने नए पर साथ हमेशा अपने हर बार नए साल के आगमन पर लिखे पन्ने कुछ नया संवार दुनिया को देखे अपने ढंग से और दिखाए कुछ कमाल कर जाएँ कुछ ऐसा कि कायम रह जाये हमारी मिसाल आप सभी को मुबारक हो दिल से ये “ 2016 “ नया साल


*********शुभ दीपावली ****************

आओ खुशी के दीप जलायें,
सब मिल मंगल गाना गायें,
फल, मीठा और मेवा खायें,
मिलकर सब दिवाली मनायें

सब्र, ज्ञान का दीप जलायें,
मन के तमस को दूर भगायें, बिखरी है जो दूर रोशनी,
उसको मन  के भीतर लायें गर मिले गरीबी का अंधियारा,
अपनेपन से  उसे मिटायें जगमग- जगमग चकाचौंध से,
पथ से अपने भटक ना जायें,
अपनी अभिलाषाओं  के चलते,
अपनो को हम  भूल ना जायें करें ना हम अभिमान कभी भी,
सब पर अपना प्यार लुटायें खूब जलायें पटाके,फुलझड़ी
पर कभी किसी का दिल ना जलायें स्वागत  करो लक्ष्मी गणेश का,
करो प्रार्थना शुभ- लाभ वो लायें,

*********************दोस्त *******************

हँसते हँसाते  गीत गुनगुनाते चला आता है मुस्कुराते 
जीये जिंदगी खुशियों से दिखे दुख दर्द से दूर भागते 
यार दोस्तों की महफ़िल मे सबको मिले वो रंग जमा दे 
दिल से सच्चा मन  से अच्छा मिल गया अचानक मुझे चौकाते 
दोस्त है पाया तुम में अच्छा यूँ ही रहना मुस्कुराते

************तुम ***********

गुमसुम से जहाँ में हंसी बन गए तुम आँखों की नमी की ख़ुशी बन गए तुम किस तरह करूँ शुक्रिया कहाँ हो तुम
अब तो यहाँ भी और वहां भी हो तुम 
आशा की हर लहर में हो तुम उमीदों की हर किरण में हो तुम दिन उजले और रातों के अंधियारों में तुम कहाँ छिपाऊँ मेरी अब हर बात में हो तुम 

*********जश्न ए आज़ादी********

आज़ादी का दिन है आया खुशियां चारों ओर वो  लाया
हमने आशा का दीप जलाया हर घर है तिरंगा लहराया
आज उड़े आज़ाद परिंदे जैसे. वैसे हर एक दिल मुसकाया
पर  वो बेड़ी नज़र ना आती जिसने मेरा दिल दहलाया
आज बेटियों के मान पर अभिमान का ध्वज लहराया
बेटे की है चाह मे किसने बेटी के लहू से नहाया
खेल खिलौने वाले हाथों मे झाडू, हतोडा  किसने थमाया
एक किसान जो देता  अन्न धान्य उसको मजबूर किसने बनाया
क्या आज़ादी के माने ये है महापुरुषों ने क्या ये पाढ पढ़ाया
देकर अपने शीश की भेंट को शहीदों ने. मान बढ़ाया
पर क्या उनके मान को हमने आज कोई सम्मान दिलाया
सोचें इस भरत पर्व पे हम सब हमने क्या खोया और क्या पाया
और करें संकल्प सभी करेंगी अच्छा जो हमे बुज़ुर्गों ने सिखाया
जय हिंद  भारत माता की जय
आज़ादी के इस पवन पर्व पर आप सभी को हार्दिक शुभकामना
तनुजा श्रीवस्तव

*****************फिजा *************************

धुंध पड़ी है आज  फिजा में महक घुली है आज हवा में
कैसा संदेशा है लायी जिसको पंछी लिए उडे गगन में
दूर गगन में बदल डोले पानी लेके अंतर्मन में
नीर झलक न जाये पलक से बैठी में इस अंतर्द्वंद में
कैसा ये एहसास सुहाना कभी दुःख है कभी ख़ुशी है मन में
तय करते है रोज़ सफ़र हम फिर भी नहीं ठिकाना जग में
खुली फिजा की साँस है अमृत कौन है विष घोल रहा है इनमे
धुंध पड़ी है आज  फिजा में महक घुली है आज हवा में

************इच्छा तर्पण*****************

वो क्या है जो हमे रोक रहा स्वछंद जीने से 
वो क्युन हमे रोक रहा खुशियां पिरोने से 
हम क्युन नही निकल रहे उस खुशी के रास्ते पे 
हम क्युन करें उनके लिये फूल इच्छा के तर्पण 
नही रुकेंगी, नही सहेंगी अब ये बेड़ियाँ
बढ़ चलेंगी खुद उड़ेंगी अपने परों से
नही सुनेगी, नही रुकेगी, किसी के रोके से
हम ज्वाला है, हम शक्ति हम नारी है, हम ही मुक्ति है
कर पहचान बढ़ेंगी हर दम से
नही थमेंगी किसी के डर से

*************बारिश***************

बारिश की झडी लगी है कहती हम से वही कडी है
वो बचपन की यादे ढूॅढे 
जिनमे भिगे भागे घूमे 
वो मिलने के सपने देखे
जिनमे खो जाने को मचले
बहुत पुरानी याद पडी है
बारिश की फिर झडी लगी है
कितने सावन बिते तुम बिन
कितने तुम संग साथ बिताये
बूंद पडे जब इस तन पर तो
बहला जाये मन ये गाये 
मनलुभावन ये वो घडी है
बारिश की फिर झडी लगी है
गुमसुम गुमसुम गुपचुप गुपचुप
उसकी आहट दिल तक आये
हमने पल जो साथ बिताये
पलक झपकते बह वो जाये
जैसे बारिश गिरती जाये 
बडी सुहानी याद पडी है
देखो बारिश की फिर वो झडी लगी है

*********************यारीयाँ*************************

यारों की यारी जैसे खुशी की फुलवारी 
यारों की यारी जैसे याद हो कोई प्यारी 
यारों की यारी जैसे महकती फुलवारी 
यारों की यारी दिलो जान हो हारी 
यारों की यारी दिलकश खुमारी 
यारो की यारी याद आये हर बारी 
यारों की यारी जैसे कोई मनमानी 
यारों की यारी जैसे कीमत बेमानी 
यारों की यारी पल पल साथ बितानी 
यारों की यारी का क्या करूँ  बयाँ इतनी खूबसूरत इतनी प्यारी की शब्द ना मिले ना कही जाये ये किसी की जुबानी

****************गुरु वंदना **************

गुरु बिन ज्ञान नहीं आधार नहीं “गुरुर्ब्रह्मा माने गुरु जो करती सृजन हमारा उस ब्रम्हा रूपी गुरुवर को नमन” “गुरुर्विष्णुः माने गुरु जो करते है हमारे अवगुण का नाश उस विष्णु रूपी गुरु को प्रणाम” “गुरुर्देवो माहेश्वर माने गुरु जो देते है अपार स्नेह और वरदान ज्ञान के रूप में ऐसे शिव रुपी गुरु को वंदन” “आज जो पाया इस जीवन में गुरु की कृपा से पग पग में हम बढ़ें जिंदगी में कुछ करें यह ज्ञान मिला उनके चरणों में सूरज के उजियारे जैसा तेज़ है उनके चेहरे में ऐसे गुरुवर गुनी जनो का आशीर्वाद है मेरे जीवन में मिटटी के ढेर को आकार दिया ज्ञान भरा अन्तः मन में
दिया बहुत कुछ गुरु ने हमको ये पुस्फ करूँ मैं अर्पण उनके चरणों में”

***********बयां ***************

हसरतें इतनी न बढ़ा की कदम रुक न सके  ये सोच कुछ कहने से पहेले हम रुक जाते है  आलम ऐ जिक्र न कर की  जब गुफ्तगू ना हो  ये ही सोच कर तेरी तरफ खिचे चले आते हैं ..............

*************सुबह ***********

नयी दुल्हन जैसी किरणे आयी
धरती पर वो मोती बिखराई
पलछीन में ओस बनायी
ओस उड़ी उन सपनो जैसी
जैसे जैसे धूप गहराई

**************भुलाना *************

वो हमसे कहते है ना रख नाज़्दीकीया इतनी 
दूर जाना मुश्किल हो जाये 
पर हम कहते है की नज़्दीकीया तो तब बढ़ेंगी 
जब आपको भुलाया जाये 
किसी ने कहा है 
वो उन्हे याद करें की भुलाया हो जिन्हे 
हमने उनको ना भुलाया ना कभी याद किया 
......

**********''’''वो दिन वो पल्छीन '""""**********

लो आया वो दिन फ़िर नयी सी ख्वाहिश ले कर
जो बीता चले हम एक साथ कुछ यादें जी कर
वो लम्हे वो पलछीन हमे बरसो
याद आयेंगे
उस खुशी का हमेशा एहसास. दिलायेंगे कुछ गुदगुदा कर
याद करेंगे जब वो गीत जो हमे गये
आँखें छलक पड़ेंगी वो नम आँखें याद कर
वो हंसना तेरा वो पलके उठा कर देखना तेरा वो मुस्कुराकर बात टालना वो ठहाको में ग़म को दबना वो नज़रो का एक टक देख्ते रहना
दबे पैरों तले ये यादें रुलायेंगी छल कर
दिन महीने साल यूँ ही गुज़र जायेंगे पर वो दिन वो पल यू हीं
यहीं रेह जायेंगे रुककर
याद है जब हमने मुहँ मीठा किया अपने जश्न ए दोस्ती का
वो मीठा पन आज भी है इस लहू मे घुलकर
फ़िर आ गयी याद वो विरह की बेला जब हमने किया इस रात को रुख़सत एक टक तुम्हे जाते हुए देख्कर
मत भुलाना ये दिन ये पल्छीन
क्युँकी ये फ़िर आयेगा हमे मिलाने पलटकर.....

**************वो पल********************

आज भी याद है वो दिन
जैसे कल ही बिताया हो वो पल
बिताया क्या जीया हो वो पल
और उस पल में सिर्फ हम है
ना ही वो आज है ना ही वो कल
ये वी पल है जहान ना बंदिशे है जमाने की ना रस्मों के बंधन है
ना उम्र की सीमा है बस यही है वो पल
घंटो बातें करने पर भी ना खतम होने वली कहनी है ये पल
वो पल अभ्भी सजीव सा इन आँखों में चलता है
जैसे कभी ना खतम होने वाला ये पल
वो फूल शायद सुख गये होंगे पर उनकी महक से खुस्नुमा है ये पल
वो रास्ते अब भी आबाद होंगे
पर उन्मे छुपी उस तनहाई जैसा पल
हम जुदा हुए जिस पल आज भी सिसकियाँ लेता है वो पल
तेरे आने की राह ताके बैठा सहमा सकुचा सा ये पल

****************तुम बिन**************

तुम बिन जीना जैसे तन मे रूह ना होना
बैठे चुपचाप एक टक देखना दूर वो शीतिज़ का कोना
खाली शाम और जुगनुओं का रोना
कहीं दिवाली की रोशीनी कहीं खाली आसमान होना
मिलने चले हम तुमसे पर साथ खयाल का होना
तुम बीन जीना जैसे तन मे रूह ना होना
चली हवा फिर खुशबू लेई जिसे महके दिल का कोना
ना उमीदी की छटा घहरायी जैसे कोई स्वपन अन्होना
गुनगुन करती हवा सरसराई जैसे गुंजा स्वर कोई गहरा
मन के तार वो छेड़ गया यूँ
जैसे प्यार वो पहला पहला

तुम बिन जीना जैसे तन मे रूह ना होना

**************याद ****************

आज फिर याद आये कुछ किस्से छुटे  पुराने
फिर बीती यादों का रेला आया हमे रुलाने
हम भूले न जिन्हें उम्र भर क्या वो फिर आयेंगी हमे हंसाने

**************सुहानी याद****************

बारिश की झडी लगी है कहती हम से वही कडी है
वो बचपन की यादे ढूॅढे 
जिनमे भिगे भागे घूमे 
वो मिलने के सपने देखे
जिनमे खो जाने को मचले
बहुत पुरानी याद पडी है
बारिश की फिर झडी लगी है
कितने सावन बिते तुम बिन
कितने तुम संग साथ बिताये
बूंद पडे जब इस तन पर तो
बहला जाये मन ये गाये 
मनलुभावन ये वो घडी है
बारिश की फिर झडी लगी है
गुमसुम गुमसुम गुपचुप गुपचुप
उसकी आहट दिल तक आये
हमने पल जो साथ बिताये
पलक झपकते बह वो जाये
जैसे बारिश गिरती जाये 
बडी सुहानी याद पडी है
देखो बारिश की फिर वो झडी लगी है

****************मेरे प्रियतम***************

प्यार तुम्ही श्रृंगार तुम्ही इस जीवन का आधार तुम्ही 
तुम बीन जीवन कभी ना जीना मेरा पहला प्यार तुम्ही 
तुमसे सुबह तुम्ही से शामे सारे  दिल के तार तुम्ही 
तुम्ही पे मरना तुम्ही पे मिटना 
सोचूँ मे हर बार यही 
तुमने जो सम्मान दिया है उस से बढ़कर कोई मान नही 
हर साँस  कह रही है ये मुझसे 
मेरे प्रियतम और मेरे संसार तुम्ही

************एक शक्स***************

एक शक्स  ऐसा भी देखा 
जो ना मेरी सोच के जैसा 
हम रहते अपने सपनों  मे 
हम रहते अपने अपनो मे 
उसको अलग थलग सा देखा 
हम हँसते रोते बातों पर 
उसके चेहरे पर मौन की रेखा 
हम जीते दुजों से मिलकर
उसे अकेला चलते देखा 
उसे याद हम दिन  रात है करते 
उसे ना आहें भरते देखा  
हम शिकवे करते अपनो  से 
उसे कभी ना झगड़ते देखा
हम मर मिटते है जब उस पर 
उसे कभी ना झरते देखा

************** ज़िंदगी****************

आपाधापी दौड़ा दौड़ी दौर ए ज़िंदगी है 
आज मिले कल बिछड़े दौर ए ज़िंदगी है 
कभी हँसती कभी गुनगुनाती जाये ये ज़िंदगी 
जो बीत गये वो पल वही है ज़िंदगी 
हम रुक गये जहां  ठहर गये जहां   वहीं है जिंदगी 
पर फ़िर जब कदम बढ़े तो बढ़ गयी ज़िंदगी

***************खामोशियाँ *********************

खामोशियाँ कहती और सुनती सी 
खामोशियाँ खिलती सी बुझती सी 
खामोशियाँ इठलाती सी घबराती सी 
इन खमोशीयों को समझो ना समझाओ क्युँकी इनमे है चिंगारी दबी सी 
खमोशीयों की रेहने दो खमोशीयों सी

**************राज़ ******************

कुछ अनजाना अनसुना राज ए उल्फत था छुपाने को 
हम वो कर गये बयान जो ना था  सुनाने को 
हमने कीये  ये लाख जतन तुम्हे भुलाने को 
पर याद का क्या वो तो आ ही गयी हमे रुलाने को

*************** इंतज़ार *****************

रात का आलम ना पूछ एय साकी 
गुज़री पुरी इश्क और इंतज़ार ए साथी में 
चांद उतरता गया मेरे चेहरे जैसा 
में ढूंढता रहा तुझे बेकरार जैसा 
कभी इस करवट ढूंढl कभी उस करवट 
पर तु कहीं नही था मेरे हम्नावा जैसा 
हम नही समझते क्या गलत क्या सही 
पर सही करना सीखना है ज़िंदगी जैसा 
कभी हँसाय कभी रुलाय ये ज़िंदगी किस मोड़ पर है लेई ज़िंदगी 
पर अब तो लगता है ये सिलसिला खत्म हीगा मौत जैसा

****************एक गुजारिश*********************

एक गुजारिश मेरी ऐसी कभी ना पुरी होने जैसी
छोटे बच्चों की कुछ जिद के जैसी
माँ की अंधी ममता जैसी
पल मे बिगड़े पल मे रूठे
कोई अल्हड़ जवानी जैसी एक गुजारिश मेरी ऐसी कभी ना पुरी होने जैसी हमने सोचा जीत ले जग को
पर कभी ना पूरी होने जैसी
बार बार कोशिश करते है
फ़िर दम भरते आगे बढ़ते है
लगता है ये मुश्किल थोड़ी
पर है ये बिल्कुल सपनो जैसी एक गुजारिश मेरी ऐसी कभी ना पुरी होने जैसी मंदिर मंदिर माथा टेका
कर दो भगवन ख्वाहिश पूरी
पर दिल से आवाज़ ये आयी
मत माँगो ये ख्वाहिश ऐसी
प्रयत्न करो म्रग तृष्णा तोड़ो नही है कोई है कोई ख्वाहिश ऐसी
कभी ना पुरी होने जैसी नही है कोई है कोई ख्वाहिश ऐसी
कभी ना पुरी होने जैसी

*************माँ******************

Image
माँ तु है दिल को फ़िर याद आयी
पर देखा आँखें खोल तो तु मेरे मॅन में है मुसकायी
तेरी ममता की छाँव जब से है पायी
धन्य हुआ जीवन कण कण में है खुशियां छाई
हमारी अठखेलियाँ लड़कपन गल्तीयाँ  सब तूने है छिपायी
तुझको पाया तो लगा
खुदा के रूप की नियमत है पायी
दूर कभी जो गयी हो मुझसे
हर पल तेरी बातें तेरी याद ही आयी
कभी ना जाना दूर तु हमसे
हमेशा करना हमारी हौसला अफ्जाई
ये कविता नही तुम्हारे काबिल
पर शायद इसको पढ़ कर तेरे चेहरे पर मुस्कान है छाई दुनिया की सबसे बेहतरीन माँ  को समर्पित.........

***************दोस्ती *************

हम सब चले थे साथ इन रास्तों पर
क्या खबर थी की मंज़िलें बादल जेएँगी
ये रास्ते खो जायेंगे हमे ले जायेंगे दूर कहीं दूर
पर वक़्त की आँधी ने फ़िर हमे मिलाया और जीना हमे सिखाया
तो क्युन ना जीये इस पल की मदहोशि में और टकराये दोस्ती के ये जाम
एक सुहानी शाम हमारी दोस्ती  के नाम